
Mar 15, 12:17 am
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता
एक रैंक, एक पेंशन की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे पूर्व सैन्य अधिकारियों एवं पूर्व सैनिकों ने शनिवार को फिर राष्ट्रपति को साढ़े सात हजार मेडल लौटा दिए। इनमें शौर्य चक्र, वीर चक्र, परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक सहित दर्जनों मेडल शामिल थे। इससे पहले 8 फरवरी को 2500 एवं 21 फरवरी को लगभग 3000 मेडल पूर्व सैन्य अधिकारी राष्ट्रपति को लौटा चुके हैं।
बावजूद इसके जब सरकार टस से मस नहीं हुई तो इन लोगों ने तीसरी बार सम्मान वापस करने का फैसला लिया। पूर्व की तरह शनिवार को भी राष्ट्रपति भवन में एक वरिष्ठ अधिकारी ने सभी मेडल ग्रहण किए। इस मौके पर कई पूर्व अधिकारी अपने आपको रोक नहीं पाए। उनकी आंखें छलक उठीं। उनका कहना था कि जिंदगी भर की कमाई इज्जत और सम्मान को सीने से उतारना बड़ा मुश्किल कदम है। एक मेडल के लिए फौजी दुश्मनों की अनगिनत गोलियों को झेल जाता है। इसके बाद उसकी छाती पर मेडल लटकाया जाता है। लेकिन, सरकार ने इसकी अहमियत नहीं समझी।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे भारतीय पूर्व सैनिक आंदोलन के उपाध्यक्ष मेजर जनरल सतवीर सिंह ने कहा कि संघर्ष जारी रहेगा। देश भर में लगभग 24 लाख पूर्व सैनिक सरकार की गलत नीतियों के शिकार हो रहे हैं। यही कारण है कि पूर्व सैनिक देशव्यापी आंदोलन करने को
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